Bihar SIR Dispute : बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के ज्यादा आवेदन आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चुनाव आयोग से सवाल पूछा। जानिए कोर्ट में क्या हुई बहस।
चुनाव आयोग का बयान
चुनाव आयोग की ओर से पेश एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस बार वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के कम और नाम हटवाने के ज्यादा आवेदन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक दल नाम हटाने के लिए मिले आवेदन दे रहे हैं। इसका मतलब है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया सही दिशा में जा रही है।
द्विवेदी ने आगे कहा कि वोटर खुद भी आकर बता रहे हैं कि उनका नाम किसी अन्य जगह की वोटर लिस्ट में पहले से है, इसलिए यहां से हटाया जाए। इसके अलावा, कई मामलों में मृत्युदर सूचना, या अन्य दस्तावेज के आधार पर भी नाम हटाने की अपील की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के जजों ने हैरानी जताई कि राजनीतिक पार्टियों ने नाम जुड़वाने के सिर्फ 100-120 आवेदन ही दिए हैं, जबकि हटवाने के लिए संख्या काफी ज्यादा है। कोर्ट ने पूछा, आखिर राजनीतिक दल नाम हटाने के आवेदन क्यों दे रहे हैं? इस पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि दावे और आपत्तियां 1 सितंबर की समयसीमा के बाद भी ली जा रही हैं, लेकिन इन पर विचार वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन के बाद किया जाएगा।
आधार कार्ड और दस्तावेज़ मान्यता पर बहस
एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा कि ड्राफ्ट लिस्ट में जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, उनके लिए आपत्ति दर्ज करने की समयसीमा बढ़ाई जाए और आधार को अपर्याप्त बताकर दावा खारिज न किया जाए। कोर्ट ने कहा कि आधार सिर्फ एक अतिरिक्त दस्तावेज़ है, इसे कानून में जितना दर्जा मिला है, उससे ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता। प्रशांत भूषण ने कहा कि लोगों को उनके फॉर्म में क्या कमी है, इसकी खुली जानकारी दी जानी चाहिए। चुनाव आयोग ने दावा किया कि वे लोगों को नोटिस भेजकर उनकी कमियों की जानकारी दे रहे हैं।
बिहार SIR विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर आशंका जताई, लेकिन कहा कि दावे और आपत्तियों का मौका अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित होने तक रहेगा। कोर्ट ने राजनीतिक दलों से पारदर्शिता और सक्रिय भागीदारी की अपील की है। अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित होगी।


























