सिंगरौली। सिंगरौली जिले मोरवा थाना इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रहा है जिसका मुख्य कारण है कोयले की बड़े पैमाने पर तस्करी, जिसमें कई बड़े अफसर से लेकर सफेदपोश और बिचौलिए शामिल है सूत्रों की माने तो मुख्य रूप से मोरवा थाना प्रभारी से लेकर कांस्टेबल भी इस काली कमाई में अपना मोटा हिस्सा बांध चुके हैं। इस खेल में अगर थोड़ी सी भी खटपट होती है और हिस्सेदारी में कमी आती है तो पुलिस अपना अंदाज दिखाना शुरू कर देती है ताजा मामला गोरबी निवासी जावेद मंसूरी के साथ हुआ जिसकी ट्रक कोयला ट्रांसपोर्ट में थी और अचानक आपसी खटपट होने के बाद जावेद ने ट्रांसपोर्टिंग का काम बंद कर दिया।

इसके बाद मोरवा थाना प्रभारी द्वारा अपना मुनाफा देख पीड़ित व्यक्ति को थाने बुलाकर कोयले की तस्करी करने वाले गिरोह को 375000 रुपए देने की बात कही थी। पर पीड़ित द्वारा किसी प्रकार हिसाब बाकी नहीं होने का दावा करता रहा लेकिन टीआई महोदय को तो अपने हिस्से का मोह और भी बढ़ चुका था। कोयला तस्करी में शामिल ग़ुलबहार को थाना के कारखस नरेंद्र यादव ने 375000 की चेक दिलवा डाला और किनारे ले जाकर बोले जल्द ही पैसा दे दो नहीं तो समझ लेने की धमकी मिल गई। कुछ माह तक पैसा नहीं दिए जाने पर टीआई और कोयला का काला कारोबारी ग़ुलबहार द्वारा मिलकर ट्रक MP66H1760 को ही गायब कर दिए पीड़ित के मुताबिक थाना में बुलाकर बोल ज्यादा उड़ोगे तो कोरेक्स के मामले में तुम्हे जेल भेज देंगे। पीड़ित काफी डरा हुआ है जिसने सिंगरौली एसपी और मुख्यमंत्री से शिकायत दर्ज कराई है। पूरे मामले पुलिस संदिग्ध नजर आ रही है। मामले में पुलिस लगातार पीड़ित व्यक्ति पर दबाव डालकर ट्रेलर की रिसीविंग पर सिंग्नेशचर कराने की कोशिश कर रहे है। वहीं दूसरी तरफ मामला पुलिस विभाग के संज्ञान में देने के बावजूद 375000 के चेक को बाउंस कराया गया है। अब देखना होगा कि इस मामले में पीड़ित को न्याय मिलता है या फिर पुलिस के लाठी के सामने असहाय होने को मजबूर है









