ग्राम पंचायतों में लगे सरकारी नल रिपेयरिंग में बड़े घोटाले आशंका, जांच की मांग हुई तेज

By: टीम ।। आर्यावर्त लाइव

On: Monday, April 13, 2026 2:23 PM

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सोनभद्र: म्योरपुर ब्लॉक के 73 गांवों में हैंडपंप मरम्मत के नाम पर बड़े घोटाले की आशंका, जांच शुरू होने पर खुल सकते हैं कई राज

सोनभद्र। जनपद के आदिवासी बाहुल्य म्योरपुर ब्लॉक में सरकारी धन के बंदरबांट का एक नया मामला सामने आने की आशंका जताई जा रही है। ब्लॉक के लगभग 73 गांवों में सरकारी हैंडपंपों की मरम्मत (रिपेयरिंग) के नाम पर भारी अनियमितता के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों की शिकायतों के अनुसार, कागजों पर नलों की मरम्मत दिखाकर लाखों रुपये के भुगतान की जा चुकी है, जबकि धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है।

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बता दे कि हर वर्ष गर्मी की दस्तक के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगता है। इसी को देखते हुए प्रशासन द्वारा खराब पड़े हैंडपंपों को दुरुस्त करने का अभियान चलाया जाता है। म्योरपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले 73 गांवों में भी नलों की रिपेयरिंग का कार्य आवंटित किया गया था।

सूत्रों की माने तो कागजी मरम्मत कर निकाल लिए गए पैसे

कई ऐसे हैंडपंपों की मरम्मत की रिपोर्ट लगा दी गई है जो महीनों से खराब पड़े हैं या पूरी तरह रीबोर की स्थिति में हैं।

इसके अलावा नल में प्रयोग होने वाले सामग्री का खेल

रिपेयरिंग में इस्तेमाल होने वाले सामान (जैसे वाशर, पाइप, और चैन) की गुणवत्ता बेहद खराब है या पुराने सामान को ही रंग-रोगन कर नया बता दिया गया है। म्योरपुर के दुर्गम और दूरदराज के इलाकों का लाभ उठाकर अधिकारी और ठेकेदार मिलीभगत कर सरकारी बजट को ठिकाने लगाने की जुगत में हैं।

ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग

ब्लॉक के विभिन्न गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी में उन्हें पानी के लिए कोसों दूर जाना पड़ रहा है। कागजों में नल “ठीक” दिखाए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में वे अभी भी धूल फांक रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाए।

जांच में सामने आ सकते हैं ये तथ्य:

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यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराता है, तो निम्नलिखित चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं जैसे फर्जी बिलिंग: बिना काम किए ठेकेदारों द्वारा भुगतान के लिए लगाए गए फर्जी वाउचर। रिपेयरिंग की संख्या: वास्तव में कितने नलों पर काम हुआ और रजिस्टर में कितने दर्ज हैं, इसमें बड़ा अंतर मिलने की संभावना है।

प्रशासनिक रुख:

फिलहाल इस मामले में उच्च अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए जांच की बात कही है। अब देखना यह होगा कि क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या यह फाइल भी ठंडे बस्ते में चली जाएगी। बता दे कि, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनता को पानी की किल्लत से बचाने को लेकर बड़े पैमाने पर नमामि गंगे योजना चलाई गई जिससे हर घर जल योजना के तहत लोगों को शुद्ध पानी मिल।सके ऐसे में योजना का लाभ भी जनता को मिल रहा है जिसके बाद सवाल खड़ा होता हैं कि आखिरकार जब घर घर पानी पहुंच रहा है उसके बावजूद भी सरकारी नल की उतनी ही संख्या कैसे और मरम्मत भी लगातार मामला यही खत्म नहीं होता रिपेयरिंग से निकलने वाला खराब सामान आखिरकार कहा है वही किसके पास जमा किया जा रहा है

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