
विशेष संवाददाता कन्हैयालाल सनभद्र
सोनभद्र के गुप्तकाशी क्षेत्र में प्रस्तावित करीब 17000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति रंजन राव और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार की पीठ ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और पर्यावरणीय अनुमति का ब्योरा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 28 मार्च को तय की गई है।
यह आदेश गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट के प्रधान ट्रस्टी रवि प्रकाश चौबे व सत्य प्रताप सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया गया। याचिका में कहा गया है कि गुप्तकाशी परिक्षेत्र में ऐतिहासिक, पौराणिक व धार्मिक महत्व के कई स्थल, गुफाएं, प्राचीन गुफाचित्र, भित्तिचित्र, जलस्रोत, झरने, वन्यजीव व आदिवासी समुदाय की संस्कृति मौजूद है। ऐसे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर परियोजनाएं लगाए जाने से पर्यावरण और जैव विविधता को नुकसान होने की आशंका है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से न्यायिक निगरानी में विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कराने, जनसुनवाई कराने और विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है, ताकि पर्यावरण, वन, वन्यजीव, प्राचीन गुफाओं और जनजातीय समुदाय के हितों का संरक्षण किया जा सके।

याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023-24 के दौरान नगवां व तरिया क्षेत्र के सघन वनों में बैजनाथ (3600 मेगावाट), सोमा (2400 मेगावाट), ससनाई (1750 मेगावाट), चिचलिक (1560 मेगावाट), झरिया (1620 मेगावाट) और पनौरा-बसुवारी (1500 मेगावाट) में जलविद्युत परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
उधर सोनभद्र नगर स्थित दंडईत बाबा परिसर में आयोजित बैठक में गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय पर आभार जताया।
साथ ही विजयगढ़ दुर्ग पर चैत्र पूर्णिमा पर लगने वाले मेले को लेकर चर्चा की गई और पूर्व एससी एसटी आयोग के सदस्य रामसेवक सिंह खरवार को विराट हिंदू मेले का अध्यक्ष बनाया गया। इस मौके पर कई लोग मौजूद रहे।






























