विशेष संवाददाता कन्हैयालाल मोबाइल नबर 9451746530
सोनभद्र उत्तर प्रदेश का वह जिला है जो चार राज्यों की सीमाओं से घिरा है, लेकिन विडंबना यह है कि यहां के कई गांव आज भी शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। चोपन ब्लॉक के सिंदुरिया ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री हर घर नल योजना का लाभ न मिलने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब दो-तीन वर्ष पूर्व अधिकारियों द्वारा गांव में योजना का सर्वे कराया गया और पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों के किनारे गड्ढे खोद दिए गए। इसके बाद कार्य अधूरा छोड़ दिया गया और आज तक घरों में नल की टोटी नहीं लगाई गई। अधूरे निर्माण कार्य के चलते बरसात के दौरान जलभराव और कीचड़ से कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि समुचित पेयजल व्यवस्था न होने के कारण उन्हें मजबूरन सोन नदी का दूषित पानी पीना पड़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। क्षेत्र में दो विधायक, एक मंत्री और राज्यसभा सांसद होने के बावजूद मूलभूत सुविधा का अभाव लोगों में असंतोष को और बढ़ा रहा है।
समस्या को लेकर योग गुरु आचार्य अजय पाठक (संस्थापक, धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान) के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने “जल जीवन संवाद” कार्यक्रम के तहत सोन नदी में बैठकर एक दिवसीय ‘जल सत्याग्रह–2026’ कर सांकेतिक धरना दिया।
स्थानिक ग्रामीणों ने बताया कि चोपन ब्लॉक के सिंदुरिया ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री हर घर नल योजना का लाभ अब तक नहीं मिल सका है, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों के अनुसार करीब दो से तीन वर्ष पूर्व संबंधित अधिकारियों द्वारा गांव में योजना का सर्वे कराया गया था। पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों के किनारे गड्ढे खोद दिए गए, लेकिन कार्य अधूरा छोड़ दिया गया और आज तक घरों में नल की टोटी नहीं लगाई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि अधूरे निर्माण कार्य के कारण बरसात के दौरान कई स्थानों पर कीचड़ व जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ और दुर्घटनाएं भी हुईं। इसके बावजूद अब तक योजना को पूर्ण करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई

ग्रामीण स्थानीय लालती ने बताया कि गांव के अधिकांश परिवार आज भी सोन नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सिंदुरिया ग्राम पंचायत में अब तक हर घर नल योजना के तहत एक भी घर में नल की टोटी नहीं लगाई गई है। “हम लोग दूषित पानी पी रहे हैं, जिससे बीमारी का डर बना रहता है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही,” उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा।
ललित ने यह भी कहा कि क्षेत्र से राज्य मंत्री होने के बावजूद पेयजल जैसी मूलभूत समस्या का समाधान नहीं हो पाया है, जिससे ग्रामीणों में मायूसी और आक्रोश दोनों है।

























