सिंगरौली। डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधी जहां आम जनता की गाड़ी कमाई पर धड़ल्ले से डाका डाल रहे हैं वहीं सिंगरौली जिले से पुलिस प्रशासन संवेदनहीनता और ढुलमूल रवैया की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो किसी को भी झकझोर कर रख दे एक बेबस और लाचार पिता पिछले 15 दिनों से कलेक्ट्रेट और एसपी ऑफिस की चौखट पर न्याय की भीख मांग रहा है लेकिन खाकी का दिल पर सीखने का नाम नहीं ले रहा है

पीड़ित व्यक्ति सदाबृज कुशवाहा निवासी बनौली थाना विंध्यनगर जिला सिंगरौली है जो एनटीपीसी प्लांट में दिन-रात मजदूरी करता है उसने पेट काटकर पाई पाई जोड़कर अपनी बेटी की शादी के लिए 245000 की रकम बैंक खाते में जमा की थी पीड़ित का सपना था कि वह अपनी बेटी की विदाई अच्छे से करेगा लेकिन शातिर साइबर ठगो ने उसकी इस उम्मीद पर पानी फेर दिया और खाते से पूरे 2.45 लाख रुपए उड़ा लिए।

इस घटना का शिकार होने के बाद पीड़ित न्याय की उम्मीद में तत्काल पुलिस के पास पहुंचा लेकिन मदद के बजाय स्थानीय पुलिस महकमा उसे एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर दौड़ा रहा है पिछले 15 दिनों से पीड़ित व्यक्ति कलेक्ट्रेट और जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है हैरानी की बात यह है कि जब भी पीड़ित अपनी फरियाद लेकर जाता है तो पुलिस उच्च अधिकारियों का हवाला देकर और जांच की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं सोशल मीडिया और ग्राउंड पर सामने आई तस्वीरों में पीड़ित की बेबी साफ देखी जा सकती है अपने हाथ में शिकायती पत्र और पासबुक लेकर वह सिंगरौली पुलिस के आल्हा अधिकारियों के सामने बार-बार रो रहा है गिड़गिड़ा रहा है। बेटी की शादी का समय नजदीक आ रहा है और पिता के पास अब ना तो पैसे बचे हैं और ना ही व्यवस्था में कोई उम्मीद दिख रही है इस मामले में सिंगरौली पुलिस की कार्यप्रणाली और उसकी संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आखिरकार एक गरीब मजदूर की एफआईआर दर्ज तक तत्काल कार्यवाही क्यों नहीं की गई साइबर फ्रॉड के मामले में शुरुआती कुछ घंटे में बेहद अहम होते हैं तो पुलिस 15 दिनों तक क्यों सोती रही क्या उच्च अधिकारियों का हवाला देकर पल्ला झाड़ना ही पुलिस की जिम्मेदारी है इस खबर के सामने आने के बाद अब देखना होगा की सिंगरौली के आल्हा अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर पीड़ित को न्याय दिलाते हैं या यह व्यवस्था यूं ही सिस्टम की बेरुखी का शिकार होता रहेगा।


























