मणिपुर पहुँचे पीएम मोदी, हिंसा पीड़ितों से मिले और 7300 करोड़ की परियोजनाओं की नींव रखी

By: टीम ।। आर्यावर्त लाइव

On: Saturday, September 13, 2025 2:48 PM

मणिपुर पहुँचे पीएम मोदी, हिंसा पीड़ितों से मिले और 7300 करोड़ की परियोजनाओं की नींव रखी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर के चुराचांदपुर में जातीय हिंसा पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने 7300 करोड़ रुपये से ज़्यादा की परियोजनाओं की आधारशिला रखी और शांति व विकास का संदेश दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दोपहर मणिपुर के चुराचांदपुर का दौरा किया। यह दौरा 2023 में भड़की जातीय हिंसा के दो साल बाद हुआ। प्रधानमंत्री ने हिंसा पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हाल जाना।

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पीएम मोदी ने राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित परिवारों के बच्चों से भी बातचीत की। तस्वीरों में वह छोटे बच्चों से गुलदस्ता और पेंटिंग लेते नज़र आए। एक बच्चे से मिली पक्षी के पंखों वाली टोपी पहनकर प्रधानमंत्री मुस्कुराते भी दिखे।

चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड में पीएम मोदी ने कहा कि मणिपुर में विकास के लिए शांति जरूरी है। उन्होंने बताया कि विस्थापित परिवारों के लिए 7,000 से अधिक नए घर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की बात भी दोहराई।

प्रधानमंत्री ने अपने दौरे के दौरान 7,300 करोड़ रुपये से ज़्यादा की परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें शहरी सड़कों, राजमार्ग परियोजनाओं और कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास शामिल हैं।

भाषण में पीएम मोदी ने मणिपुर में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमने सड़क और रेल नेटवर्क पर काम तेज किया है। मणिपुर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 3,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पहले कई गाँव पहुँच से दूर थे। अब सड़कों से जुड़ गए हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि इम्फाल जल्द ही राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री राजधानी इम्फाल में 1,200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे।

बता दें,मणिपुर मई 2023 से जातीय संघर्ष की चपेट में है। घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और पहाड़ी इलाकों की कुकी जनजाति आपस में टकरा रही है। विवाद भूमि अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर केंद्रित है। इस हिंसा में अब तक 260 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 50,000 लोग अपने घर छोड़कर विस्थापित हुए।

मैतेई समुदाय चाहता है कि उन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किया जाए। वहीं कुकी जनजातियाँ अलग प्रशासन की मांग कर रही हैं। वे कहते हैं कि संसाधनों और सत्ता में उनके साथ भेदभाव होता है। पीएम मोदी का यह दौरा इसी संकट के बीच संदेश देने वाला माना जा रहा है।

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