सरकारी जमीनों का हो संरक्षण- जितेंद्र श्रीवास्तव 

By: टीम ।। आर्यावर्त लाइव

On: Wednesday, July 8, 2026 4:52 PM

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दुद्धी,सोनभद्र। दुद्धी कस्बे मे स्थित सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण का मामला एक बार फिर गरमाने लगा हैं। सूत्रों की माने तो नगर पंचायत द्वारा बिना एनओसी सरकारी जमीनों पर निर्माण कार्य कराए जाने की शुरुआत के बाद सरकारी जमीनों को चिन्हित कर संरक्षण करने एवं अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग उठने लगी हैं। लोगों का कहना हैं कि स्थानीय प्रशासन अतिक्रमण हटाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करती हैं, आरोप हैं कि दुद्धी मे स्टेट एवं अन्य सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे हैं और बिना सक्षम अधिकारी के एनओसी के धड़ल्ले से नगर पंचायत द्वारा निर्माण कार्य कराए जा रहें हैं लेकिन अफ़सोस हैं कि स्थानीय प्रशासन को सिर्फ रेहड़ी एवं पटरी दुकानदार ही अतिक्रमण के जद मे आते हैं, इसलिए बार -बार सिर्फ इन दुकानदारों को ही निशाना बनाया जाता हैं।

कस्बे मे सरकारी जमीनों पर कब्जे का मामला कोई नया नही हैं, यहां चाहें स्टेट की भूमि हो या सरकारी नाला, भीठा, जलाशय, तालाब, बांध या पोखरा अधिकांश जमीनों पर अवैध कब्जा बरकरार हैं जिसको लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नही उठायी गई।इसको लेकर अधिवक्ताओं ने भी आवाज उठाई थी तब एसडीएम द्वारा आश्वासन दिया गया था कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण नही होने दी जाएगी लेकिन जिस तरह महुआरिया पोखरा और बढ़नीनाला जलाशय पर निर्माण कार्य चल रहें हैं उससे प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे मे हैं।

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दुद्धी बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय 28 जनवरी 2011 जगपाल सिंह एवं अन्य बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य तथा हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी, एआईआर 2001, एस.सी. 3215 व अन्य मामलों में यह माना कि तालाब के रूप में दर्ज भूमि को किसी भी अन्य संबद्ध उद्देश्य के लिए आवंटित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। न्यायालय ने उ०प्र० में ग्राम सभा की जमीनों को हड़पने के सम्बन्ध में भी व्यापक निर्देश दिये है, फिर भी नगर पंचायत द्वारा सरकारी जमीनों पर सुन्दरीकरण के नाम पर कार्य कराया जाना चिंतनीय हैं।उन्होंने चेतावनी दी हैं कि यदि सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे नही हटे तो अधिवक्ता व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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