शक्ति संगीत कला परिषद का ऐतिहासिक 29वाँ सांस्कृतिक समारोह—शास्त्रीय वादन, मनमोहक गायन और बिजली सी फूर्ती वाले कथक ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
शक्तिनगर / शरद पूर्णिमा की ठंडी और चांदनी रात में जब कला और आध्यात्मिकता का मिलन हुआ, तो पूरा एनटीपीसी शक्तिनगर गूँज उठा! अवसर था ‘शक्ति संगीत कला परिषद’ द्वारा आयोजित लगातार 29वें भव्य सांस्कृतिक समारोह का। भगवान शक्तेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में सजी इस महफिल ने साबित कर दिया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की जड़ें कितनी गहरी और जीवंत हैं। देश के कोने-कोने से आए दिग्गज कलाकारों ने अपनी कला का ऐसा जादू बिखेरा कि दर्शक अपनी कुर्सियों पर झूमने को मजबूर हो गए। कार्यक्रम का विधिवत आगाज़ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि ए. पी. तिवारी (महाप्रबंधक, ओ एंड एम, एनटीपीसी सिंगरौली) और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ए. के. सिंह (एचओपी, एमईआईएल, अनपरा) ने दीप जलाकर समारोह का शंखनाद किया। संस्था के पदाधिकारियों ने अतिथियों का पारंपरिक स्वागत कर इस सांस्कृतिक महाकुंभ की गरिमा को चार चांद लगाए।
समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण रहा कोलकाता के कलाकारों का जादुई वादन। कुमार सारंग के संतूर की झंकार,नीरज मिश्रा के सितार के सुरीले स्वर, और, पंडित ललित कुमार के तबले की धमाकेदार थाप
इन तीनों ने मिलकर राग वाचस्पति की ऐसी अद्भुत प्रस्तुति दी कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। मध्यलय रूपक ताल और द्रुत तीनताल में हुई जुगलबंदी ने महफिल में ऐसी ऊर्जा भरी कि तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा प्रांगण गूँज उठा। चेन्नई से आईं प्रसिद्ध गायिका दीपिका वरदराजन ने अपनी जादुई आवाज से समाँ बांध दिया।
उन्होंने राग बागेश्री के गंभीर और मधुर स्वरों से संगीत प्रेमियों को झूमने पर मजबूर किया।
इसके बाद जैसे ही उन्होंने प्रसिद्ध ठुमरी ‘याद पिया की आए’ और अंत में ‘शंभो शंकर’ भजन गाया, पूरा वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय और भावुक हो गया। हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा की संगत ने गायन के प्रभाव को और अधिक गहरा कर दिया।
लखनऊ की जुड़वां कथक नृत्यांगनाओं मीशा रतन और ईशा रतन (गुरु सुरभि सिंह के निर्देशन में) ने मंच पर आते ही आग लगा दी!
डमरू हर कर बाजे की गूँज के साथ शुरू हुए नृत्य में कथक की बारीकियों—उपज, तीन पल्ली, प्रश्न-जुड़ी और आमद—का ऐसा शानदार प्रदर्शन हुआ कि देखने वाले देखते रह गए।
इसके बाद माँ दुर्गा के नौ रूपों पर आधारित नृत्य ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए। कथक की तीव्र गति, भाव-भंगिमाओं और लखनऊ घराने की पारंपरिक बंदिशों ने साबित कर दिया कि युवा पीढ़ी हमारी समृद्ध विरासत को कितनी शिद्दत से आगे बढ़ा रही है। तबले पर उदय शंकर मिश्रा और गायन-हारमोनियम पर सागर मिश्रा ने इस प्रस्तुति में चार चाँद लगा दिए।
संगीत और नृत्य की इस अद्भुत शाम का समापन देवाधिदेव भगवान शिव की भव्य पूजा-अर्चना और आरती के साथ हुआ। इसके बाद शरद पूर्णिमा की परंपरा के अनुसार सभी को स्वादिष्ट खीर का प्रसाद वितरित किया गया।
संस्था के अध्यक्ष अशोक कुमार दुबे के स्वागत भाषण, सचिव चन्द्रशेखर जोशी की वार्षिक रिपोर्ट और डॉ. योगेंद्र तिवारी के शानदार संचालन ने कार्यक्रम को एक नई ऊँचाई दी। एनटीपीसी के कई वरिष्ठ अधिकारियों, गणमान्य नागरिकों और सैकड़ों कला प्रेमियों की उपस्थिति ने इस 29वें वार्षिकोत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। शक्ति संगीत कला परिषद का यह प्रयास कला जगत के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ गया!







