(तीन माह के सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ; प्रशिक्षण उपरांत सिलाई मशीनों का वितरण, 2,000 पर्यावरण-अनुकूल कपड़े के थैले बनाने का लक्ष्य)
एनटीपीसी सिंगरौली द्वारा नैगम सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण, कौशल विकास एवं सतत आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से तीन माह के सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है।
कार्यक्रम का शुभारंभ ई. प्रभाकर राव, परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक, एनटीपीसी सिंगरौली तथा श्रीमती ई. निर्मला राव, अध्यक्षा, वनिता समाज के कर-कमलों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर ई. प्रभाकर राव ने कहा कि महिलाओं का सशक्तीकरण एवं उन्हें आजीविका के स्थायी अवसर उपलब्ध कराना समावेशी सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण आयाम हैं। उन्होंने कहा, “एनटीपीसी सिंगरौली की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। हमें विश्वास है कि इस कार्यक्रम से महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के साथ अपने परिवार एवं समाज की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी।”

श्रीमती ई. निर्मला राव, अध्यक्षा, वनिता समाज ने कहा कि कौशल विकास महिलाओं में आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता एवं उद्यमशीलता की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। सिलाई प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को अपनी प्रतिभा विकसित करने तथा घर से ही आजीविका अर्जित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कपड़े के थैलों के निर्माण को पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ जीवनशैली से जोड़ते हुए इसे महिला सशक्तीकरण के साथ सामाजिक जागरूकता की दिशा में भी उपयोगी पहल बताया।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष प्रतिभागी महिलाओं एवं मुख्य अतिथि के बीच संवाद एवं परिचर्चा रही। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण से अपनी अपेक्षाएँ साझा करने के साथ प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद स्वरोजगार शुरू करने, सिलाई कार्य को आजीविका के रूप में विकसित करने तथा भविष्य में अपनी गतिविधियों के विस्तार से संबंधित योजनाओं पर चर्चा की। मुख्य अतिथि ने महिलाओं को प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने, अपने कौशल को निरंतर निखारने तथा अर्जित दक्षता को आय-सृजन से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। इस संवाद ने कार्यक्रम को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखते हुए उसके दीर्घकालीन आजीविका एवं आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को भी रेखांकित किया।
समृद्धि साक्षरता समिति के माध्यम से संचालित इस तीन माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम से चिल्काडांड, कोटा, परसवार राजा एवं आसपास के ग्रामों की महिलाएं लाभान्वित होंगी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिभागियों को सिलाई, परिधान निर्माण तथा बुनियादी सिलाई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाली सभी प्रतिभागियों को सिलाई मशीनें वितरित की जाएंगी, जिससे वे घरेलू स्तर पर सिलाई कार्य प्रारंभ कर आय के स्थायी स्रोत विकसित कर सकेंगी।
महिला सशक्तीकरण के साथ पर्यावरण संरक्षण इस पहल का एक अन्य महत्वपूर्ण आयाम है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों द्वारा लगभग 2,000 पर्यावरण-अनुकूल कपड़े के थैलों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन थैलों को समुदाय में वितरित कर एकल-उपयोग प्लास्टिक के विकल्प के रूप में कपड़े के थैलों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
कार्यक्रम में अगम प्रकाश तिवारी, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण), रश्मिरंजन मोहंती, महाप्रबंधक (परियोजना), सुनील कुमार मिश्रा, महाप्रबंधक (इंजीनियरिंग), सिद्धार्थ मंडल, विभागाध्यक्ष (मानव संसाधन), नरेश कुमार, उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन), डॉ. ओम प्रकाश, उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन–राजभाषा) सहित वनिता समाज की वरिष्ठ सदस्याओं एवं एनटीपीसी सिंगरौली के अन्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
एनटीपीसी सिंगरौली की यह सीएसआर पहल ‘प्रशिक्षण से कौशल, कौशल से स्वरोजगार और स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता’ की अवधारणा को मूर्त रूप देते हुए ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, सतत आजीविका और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।







